फ्रांसीसी क्रांति के कारण: एक विस्तृत विश्लेषण

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 फ्रांसीसी क्रांति के कारण: एक विस्तृत विश्लेषण स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए


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फ्रांसीसी क्रांति के कारण - सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और बौद्धिक कारणों की पूरी जानकारी



फ्रांसीसी क्रांति के कारणों की गहन जानकारी प्राप्त करें। जानें कि सामाजिक असमानता, आर्थिक संकट, राजनीतिक भ्रष्टाचार और बौद्धिक आंदोलन ने कैसे 1789 की महान क्रांति को जन्म दिया। छात्रों के लिए पूर्ण मार्गदर्शिका।


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परिचय: एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत


फ्रांसीसी क्रांति (1789-1799) न केवल फ्रांस का बल्कि पूरे विश्व का इतिहास बदलने वाली घटना थी। यह क्रांति रातों-रात नहीं आई बल्कि दशकों से चले आ रहे कारणों का परिणाम थी। जब हम फ्रांसीसी क्रांति के कारण खोजते हैं, तो हमें पता चलता है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि कई जटिल कारकों का मिश्रण थी। इस लेख में, हम विस्तार से समझेंगे कि किन परिस्थितियों ने फ्रांस के लोगों को क्रांति के लिए मजबूर किया।


सामाजिक कारण: असमानता की जड़ें


तीन एस्टेट्स की व्यवस्था


फ्रांस की सामाजिक व्यवस्था 18वीं शताब्दी में तीन एस्टेट्स (वर्गों) में बंटी हुई थी:


प्रथम एस्टेट (पादरी वर्ग):


· कुल आबादी का लगभग 0.5%

· चर्च के पास विशाल भूमि स्वामित्व (देश की 10% भूमि)

· कोई कर नहीं देना पड़ता था

· चर्च द्वारा एकत्र किया गया टाइथ (दशमांश) कर


द्वितीय एस्टेट (कुलीन वर्ग):


· कुल आबादी का लगभग 1.5%

· सभी उच्च सरकारी और सेना पदों पर कब्जा

· विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग - करों से मुक्त

· सामंती अधिकारों के तहत किसानों से कर वसूलना


तृतीय एस्टेट (सामान्य जनता):


· कुल आबादी का 98%

· इसमें किसान, मजदूर, दस्तकार, डॉक्टर, वकील, व्यापारी सभी शामिल

· सभी प्रकार के कर देने के लिए बाध्य

· कोई राजनीतिक अधिकार नहीं


सामाजिक असंतोष की भावना


इस असमान व्यवस्था ने तृतीय एस्टेट में गहरा असंतोष पैदा किया। वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार थे। किसानों पर सबसे ज्यादा बोझ था - वे राज्य को कर देते, कुलीनों को सामंती कर देते, और चर्च को दशमांश देते थे। इतना सब देने के बाद उनके पास अपने परिवार के लिए बहुत कम बचता था।


आर्थिक कारण: देश की खाली खजाना


राजकोषीय संकट


फ्रांस का राजकोष लगातार खाली हो रहा था। इसके प्रमुख कारण थे:


1. लुई सोलहवें का अयोग्य शासन: राजा लुई सोलहवें (1774-1793) एक कमजोर शासक थे। उनमें निर्णय लेने की क्षमता कम थी और वे अपनी पत्नी मैरी एंटोनेट के प्रभाव में रहते थे।

2. अनावश्यक युद्धों में धन की बर्बादी: फ्रांस ने सात साल के युद्ध (1756-1763) और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्रह (1775-1783) में भाग लिया। अमेरिकी क्रांति में फ्रांस ने अमेरिका का समर्थन किया जिससे उस पर 2 अरब लिव्र्स का कर्ज हो गया।

3. राजा और रानी का अपव्ययी जीवन: वर्साय के महल में राजा का दरबार बहुत भव्य और खर्चीला था। मैरी एंटोनेट को "मैडम डेफिसिट" (घाटे की महिला) कहा जाता था क्योंकि उनका खर्च बहुत ज्यादा था।

4. कर व्यवस्था की विफलता: सिर्फ तृतीय एस्टेट कर देता था जबकि धनी वर्ग कर से मुक्त थे। इससे सरकार की आय पर्याप्त नहीं थी।


भोजन संकट और महंगाई


1780 के दशक में फ्रांस में कई समस्याएं एक साथ आईं:


· 1788 में भारी ओलावृष्टि हुई जिससे फसल बर्बाद हो गई

· 1788-89 की सर्दी बहुत कठोर थी, नदियाँ जम गईं

· खाद्यान्न की कमी से रोटी की कीमतें आसमान छूने लगीं

· एक मजदूर का लगभग 80% वेतन सिर्फ रोटी खरीदने में खर्च होता था

· बेरोजगारी बढ़ी और गरीबी चरम पर पहुँच गई


नेकर की बर्खास्तगी


राजा लुई सोलहवें के वित्त मंत्री जैक्स नेकर ने सुधारों का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रथम और द्वितीय एस्टेट को भी कर देना चाहिए। लेकिन कुलीन वर्ग और पादरी वर्ग के विरोध के कारण 1781 में नेकर को बर्खास्त कर दिया गया। इससे आम जनता में और रोष फैल गया।


राजनीतिक कारण: निरंकुश शासन की विफलता


निरंकुश राजतंत्र


फ्रांस में राजा का शासन पूर्णत: निरंकुश था। लुई सोलहवें ने "दैवीय अधिकार के सिद्धांत" पर शासन किया। उनका मानना था कि उन्हें ईश्वर ने शासक बनाया है और वे केवल ईश्वर के प्रति उत्तरदायी हैं। इस सिद्धांत के अनुसार:


· राजा की इच्छा ही कानून थी

· राजा किसी के प्रति जवाबदेह नहीं था

· एस्टेट्स-जनरल (संसद) को 175 साल से नहीं बुलाया गया था (1614 से 1789 तक)


प्रशासनिक भ्रष्टाचार


पूरा प्रशासन तंत्र भ्रष्ट और अक्षम हो चुका था:


· पद खरीदे और बेचे जाते थे

· कानून व्यवस्था खराब थी

· न्यायालयों में भ्रष्टाचार फैला हुआ था

· अलग-अलग क्षेत्रों के अलग-अलग कानून थे


एस्टेट्स-जनरल का असमान प्रतिनिधित्व


1789 में जब आर्थिक संकट चरम पर था, राजा को एस्टेट्स-जनरल बुलाना पड़ा। लेकिन इसमें प्रतिनिधित्व की प्रणाली बहुत अन्यायपूर्ण थी:


· प्रत्येक एस्टेट को एक वोट दिया गया

· इसका मतलब था कि 2% आबादी (प्रथम और द्वितीय एस्टेट) के पास 2 वोट थे

· 98% आबादी (तृतीय एस्टेट) के पास सिर्फ 1 वोट था

· तृतीय एस्टेट ने माँग की कि वोट व्यक्तिगत हों और सामूहिक नहीं, लेकिन राजा ने इनकार कर दिया


टेनिस कोर्ट की शपथ


जब तृतीय एस्टेट की माँगें नहीं मानी गईं, तो उन्होंने 20 जून 1789 को एक टेनिस कोर्ट में इकट्ठा होकर शपथ ली कि जब तक फ्रांस के लिए संविधान नहीं बन जाता, वे अलग नहीं होंगे। यह घटना क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।


बौद्धिक कारण: नए विचारों की आँधी


प्रबोधन युग के दार्शनिक


18वीं शताब्दी को "प्रबोधन युग" कहा जाता है। इस दौरान कई महान विचारकों ने ऐसे विचार दिए जो पुरानी मान्यताओं को चुनौती देते थे:


मॉन्तेस्क्यू (1689-1755):


· "द स्पिरिट ऑफ लॉज़" नामक पुस्तक लिखी

· शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत दिया

· कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अलग-अलग होनी चाहिए

· फ्रांस की निरंकुश व्यवस्था की आलोचना की


वाल्टेयर (1694-1778):


· चर्च और पादरियों की आलोचना की

· धार्मिक सहिष्णुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर दिया

· उन्होंने कहा, “मैं आपके विचारों से सहमत नहीं हूँ, फिर भी आपके अभिव्यक्ति के अधिकार की पूरी तरह रक्षा करूँगा।”


रूसो (1712-1778):


· "द सोशल कॉन्ट्रैक्ट" नामक पुस्तक लिखी

· लोकतंत्र और जनता की इच्छा के शासन का समर्थन किया

· कहा: "मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह बेड़ियों में जकड़ा हुआ है"

· राजा के दैवीय अधिकार के सिद्धांत को चुनौती दी


इन विचारों का प्रभाव


ये विचार समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचे:


· पुस्तकें और पैम्फलेट छपने लगे

· कॉफी हाउसों और सैलून में इन विचारों पर चर्चा होने लगी

· शिक्षित मध्यम वर्ग इन विचारों से प्रभावित हुआ

· लोगों में जागरूकता आई कि निरंकुश शासन अनुचित है


अमेरिकी क्रांति का प्रभाव


अमेरिकी स्वतंत्रता संग्रह (1775-1783) ने फ्रांसीसी लोगों को गहराई से प्रभावित किया:


· फ्रांस ने अमेरिका को सैन्य सहायता दी

· लाफायेट जैसे फ्रांसीसी सैनिक अमेरिका गए और लोकतांत्रिक विचारों से प्रभावित हुए

· अमेरिकी संविधान और अधिकारों का विचार फ्रांस पहुँचा

· फ्रांसीसियों ने देखा कि एक क्रांति संभव है और उससे स्थापित व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है


तत्कालीन कारण: क्रांति की चिंगारी


बास्तील का पतन (14 जुलाई 1789)


यह घटना फ्रांसीसी क्रांति का प्रतीक बन गई:


· पेरिस के लोगों को डर था कि राजा सेना बुलाकर एस्टेट्स-जनरल को भंग कर देगा

· उन्होंने हथियारों की तलाश में बास्तील के किले पर हमला किया

· बास्तील राजनीतिक कैदियों का कारागार और निरंकुश शासन का प्रतीक था

· इसके पतन से क्रांति की शुरुआत हो गई


महिलाओं का वर्साय पर मार्च (5 अक्टूबर 1789)


रोटी की कमी से तंग आकर पेरिस की हज़ारों महिलाओं ने वर्साय के महल का रुख किया:


· उनकी माँग थी कि राजा पेरिस आए और खाद्य समस्या का समाधान करे

· राजा लुई सोलहवें को पेरिस आना पड़ा

· इससे राजशाही की शक्ति कमजोर हुई


निष्कर्ष: कारणों का संयुक्त प्रभाव


फ्रांसीसी क्रांति के कारण एक दूसरे से जुड़े हुए थे। कोई एक कारण अकेला क्रांति नहीं ला सकता था:


1. सामाजिक असमानता ने आधार तैयार किया

2. आर्थिक संकट ने स्थिति को विस्फोटक बनाया

3. राजनीतिक भ्रष्टाचार ने लोगों का धैर्य खत्म किया

4. बौद्धिक जागरण ने वैचारिक आधार दिया

5. तत्कालीन घटनाओं ने चिंगारी का काम किया


फ्रांसीसी क्रांति ने केवल एक राजा का सिर नहीं काटा, बल्कि पूरी सामंती व्यवस्था को समाप्त किया। इसने "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" के आदर्शों को जन्म दिया जो आज भी दुनिया भर के लोकतंत्रों की प्रेरणा हैं। यह क्रांति मनुष्य के अधिकारों, संवैधानिक शासन और राष्ट्रवाद की भावना के विकास में एक मील का पत्थर साबित हुई।


फ्रांसीसी क्रांति से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब शासन व्यवस्था जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं से दूर हो जाती है, तो परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है। यह इतिहास का वह पाठ है जो आज भी प्रासंगिक है।


फ्रांसीसी क्रांति के कारण 10 अंकों का उत्तर


1789 ई० में हुई फ्रांसीसी क्रांति विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारण थे।


सबसे पहला कारण सामाजिक असमानता था। फ्रांस का समाज तीन वर्गों में बँटा हुआ था—पादरी वर्ग, कुलीन वर्ग और तृतीय वर्ग। पहले दो वर्गों को विशेषाधिकार प्राप्त थे, जबकि तृतीय वर्ग को सभी प्रकार के कर चुकाने पड़ते थे।


दूसरा कारण आर्थिक संकट था। लगातार युद्धों, शाही परिवार की फिजूलखर्ची और गलत कर व्यवस्था के कारण फ्रांस की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई। जनता भूख और बेरोज़गारी से परेशान थी।


तीसरा कारण राजा लुई सोलहवें की अयोग्य शासन व्यवस्था थी। राजा समस्याओं को समझने और सुधार लागू करने में असफल रहा।


चौथा कारण दार्शनिकों का प्रभाव था। रूसो, वोल्तेयर और मोंतेस्क्यू जैसे विचारकों ने स्वतंत्रता, समानता और जनसत्ता के विचार फैलाए।


इन सभी कारणों के परिणामस्वरूप फ्रांसीसी क्रांति हुई।



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🔶 15 अंकों का उत्तर फ्रांसीसी क्रांति के कारण


फ्रांसीसी क्रांति के कारण


फ्रांसीसी क्रांति (1789 ई०) आधुनिक विश्व इतिहास की एक युगांतकारी घटना थी। इस क्रांति के पीछे कई गहरे और परस्पर जुड़े हुए कारण थे।


सबसे महत्वपूर्ण कारण सामाजिक असमानता था। फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में विभाजित था। पादरी और कुलीन वर्ग को करों से छूट थी, जबकि तृतीय वर्ग—जिसमें किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग शामिल थे—सभी करों का बोझ उठाता था।


दूसरा प्रमुख कारण अन्यायपूर्ण कर प्रणाली थी। नमक कर, भूमि कर और चर्च कर ने जनता का जीवन कष्टमय बना दिया।


तीसरा कारण आर्थिक संकट था। अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में फ्रांस की भागीदारी, लगातार युद्ध और शाही दरबार की विलासिता से राजकोष खाली हो गया। महँगाई और खाद्य संकट ने जनता में असंतोष बढ़ा दिया।


चौथा कारण राजा लुई सोलहवें की कमजोरी और प्रशासनिक असफलता थी। वह सुधार लागू करने में असमर्थ रहा और निर्णय लेने में देर करता रहा।


पाँचवाँ कारण ज्ञानोदय काल के दार्शनिकों का प्रभाव था। रूसो ने समानता और जनसत्ता की बात की, वोल्तेयर ने निरंकुश शासन का विरोध किया और मोंतेस्क्यू ने शक्ति विभाजन का सिद्धांत दिया।


छठा कारण अमेरिकी क्रांति का प्रभाव था, जिससे फ्रांसीसी जनता को यह विश्वास हुआ कि अत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष संभव है।


इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से फ्रांसीसी क्रांति हुई, जिसने राजतंत्र का अंत कर लोकतंत्र की नींव रखी।



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